का सरल उत्तर
तंत्रालोक: तांत्रिक ध्यान = देवता की स्पष्ट भावना। पाँच विधियाँ: देवता-स्वरूप ध्यान (ध्यान-श्लोक से), यंत्र-ध्यान (केंद्र-बिंदु पर), मंत्र-नाद ध्यान (भीतर से सुनना), चक्र-ध्यान (बीज-चक्र संयोग), 'देवता=स्वयं' भाव (सर्वोच्च)। विशेषता: सामान्य ध्यान में मन शांत, तांत्रिक में देवता जागृत।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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