का सरल उत्तर
तंत्र में न करें: साधना बीच में न छोड़ें, प्रदर्शन नहीं, भय नहीं, अहंकार नहीं, दुरुपयोग (हानि/वशीकरण) नहीं, तामसिक आहार नहीं, क्रोध-लोभ से नहीं। कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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