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तंत्र वर्जन📜 कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र साधना के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र में न करें: साधना बीच में न छोड़ें, प्रदर्शन नहीं, भय नहीं, अहंकार नहीं, दुरुपयोग (हानि/वशीकरण) नहीं, तामसिक आहार नहीं, क्रोध-लोभ से नहीं। कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना के वर्जनों का वर्णन कुलार्णव तंत्र और महानिर्वाण तंत्र में है:

1साधना बीच में न छोड़ें

एक बार आरंभ की साधना — पूर्ण करें। अधूरी साधना = हानिकारक।

2प्रदर्शन न करें

कुलार्णव: 'गोपनीयता' — साधना, मंत्र, अनुभव किसी को न बताएं।

3भय न रखें

तंत्र में भय = सबसे बड़ी बाधा। भयभीत मन में नकारात्मक अनुभव आते हैं।

4अहंकार न करें

सिद्धि मिलने पर अहंकार — तंत्र में सबसे खतरनाक। सिद्धि नष्ट होती है।

5दुरुपयोग वर्जित

किसी को हानि, वशीकरण — कर्म नियम से साधक को ही लौटता है।

6तामसिक आहार

मद्य, मांस, प्याज-लहसुन — दक्षिण मार्ग में वर्जित।

7अशुद्ध मन

क्रोध, लोभ, ईर्ष्या के साथ साधना — शक्ति विपरीत दिशा में।

8साधना बाधित न करें

माला उठाकर बीच में न रखें, बात न करें।

9गुरु के निर्देश अनदेखा न करें

कुलार्णव: 'स्वेच्छाचारी साधक नष्ट होता है।'

10परिवार पर न थोपें

अपनी साधना परिवार के अन्य सदस्यों पर नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
कुलार्णव तंत्र, महानिर्वाण तंत्र
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