ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
पूजा नियम📜 धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, अग्नि पुराण3 मिनट पठन

पूजा करते समय क्या नहीं करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

पूजा में वर्जित: बिना स्नान, मैले वस्त्र, जूते-चप्पल, बासी फूल, खंडित फूल, दक्षिण मुख, पूजा बीच में छोड़ना, देवता की पीठ की ओर बैठना। पूजा के समय बात न करें, मोबाइल दूर रखें। प्रत्येक देवता के वर्जित फूल अलग हैं — शिव को केतकी, गणेश को तुलसी वर्जित।

📖

विस्तृत उत्तर

पूजा में वर्जित कार्यों का वर्णन धर्म सिंधु, अग्नि पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से मिलता है:

शरीर शुद्धि संबंधी वर्जन

  1. 1बिना स्नान पूजा न करें — स्नान के बिना पूजा अशुद्ध मानी जाती है
  2. 2जूते-चप्पल पहनकर पूजा न करें
  3. 3अशुद्ध वस्त्रों में पूजा न करें — पहने हुए, मैले वस्त्र नहीं
  4. 4बालों को खुला छोड़कर न बैठें (महिलाओं के लिए) — बाल बाँधकर पूजा करें
  5. 5पूजा के बीच शौच न जाएं — यदि जाना पड़े तो पुनः स्नान या हाथ-पैर धोकर आचमन करें

मन और वाणी संबंधी वर्जन

  1. 1पूजा के समय बात न करें — मन एकाग्र रखें
  2. 2मोबाइल फोन पूजा में न लाएं — मन भटकता है
  3. 3झूठ और क्रोध से बचें — पूजा से पूर्व और पूजा काल में
  4. 4पूजा में जम्हाई (उबासी) लेने पर — तर्जनी दाँतों के बीच रखें
  5. 5छींक आने पर — 'श्री राम' कहें और पुनः आचमन करें

सामग्री संबंधी वर्जन

  1. 1बासी फूल और जल न चढ़ाएं — प्रतिदिन ताजा फूल और जल अर्पित करें
  2. 2खंडित (टूटे) फूल न चढ़ाएं
  3. 3सूंघे हुए फूल न चढ़ाएं
  4. 4वर्जित पुष्प न चढ़ाएं — प्रत्येक देवता के वर्जित पुष्प अलग:
  • शिव — केतकी, तुलसी वर्जित
  • गणेश — तुलसी वर्जित
  • विष्णु/लक्ष्मी — हल्दी वर्जित (कुछ परंपराओं में)

दिशा और स्थान संबंधी वर्जन

  1. 1दक्षिण मुख करके न बैठें — पूजा में दक्षिण मुख पितृ कार्य के लिए है
  2. 2शयन कक्ष में पूजा न करें — अलग पूजा स्थान रखें
  3. 3भोजन स्थान पर पूजा न करें

पूजा विधि संबंधी वर्जन

  1. 1पूजा बीच में न छोड़ें — एक बार आरंभ किया तो पूर्ण करें
  2. 2दूसरे के देवता की पूजा सामग्री न छुएं
  3. 3एक हाथ से दीप न जलाएं — दोनों हाथों से या दाहिने हाथ से
  4. 4पूजा का प्रसाद जमीन पर न फेंकें
  5. 5देवता की पीठ की ओर मुख न करें

धर्म सिंधु का सार

पूजाकाले मनः शुद्धिः सर्वोपरि।' — पूजा के समय मन की शुद्धि सर्वोपरि है। बाहरी नियमों से भी अधिक महत्वपूर्ण है भीतरी भाव।
📜
शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, अग्नि पुराण
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

पूजा वर्जनपूजा नियमक्या न करेंशुद्धता

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

पूजा करते समय क्या नहीं करना चाहिए — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको पूजा नियम से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, अग्नि पुराण पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।