का सरल उत्तर
तंत्र पूजा: स्नान → मंत्र न्यास (शरीर पर अक्षर) → भूत शुद्धि (देव-शरीर धारण) → प्राण प्रतिष्ठा → षोडशोपचार → मंत्र जप → समर्पण। विशेषता: तंत्र में 'सोऽहम् भावना' — स्वयं को देव मानकर पूजा।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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