तंत्र साधना से आत्मज्ञान कैसे मिलता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
तंत्र से आत्मज्ञान: प्रत्यभिज्ञा — 'मैं पहले से ही शिव हूँ।' 'सोऽहम्' श्वास में। कुंडलिनी सहस्रार = शिव-शक्ति मिलन। द्वैत विसर्जन। विज्ञान भैरव: 'यह तो मैं ही हूँ!' कुलार्णव: 'शिवभावेन पूजयेत्।'
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