'त्रीणि पदा विचक्रमे' मंत्र का क्या अर्थ है?
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सरल उत्तर
ऋग्वेद (1.22.18): 'त्रीणि पदा विचक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः। अतो धर्माणि धारयन्॥' अर्थ: सृष्टि के रक्षक (गोपाः) भगवान विष्णु तीन कदमों से सम्पूर्ण जगत को नाप लेते हैं और वे ही समस्त धर्मों को धारण करते हैं।
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