का सरल उत्तर
कन्यादान: तुलसी का कोमल पत्ता/मंजरी दाहिने हाथ के अंगूठे से शालिग्राम जी को अर्पित करें। श्लोक: 'अनादि मध्य निधनात्रैलोक्य परिरक्षक। इमां गृहाण तुलसीं विवाह विधिनेश्वर॥' यह अहंकार का विसर्जन और पूर्ण शरणागति का प्रतीक है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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