उपनिषद में तपस्या का महत्व क्या है?
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सरल उत्तर
तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) में 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है। भृगु ने बार-बार तप करके आनंदमय ब्रह्म को जाना। छान्दोग्य (8/5/1) — 'ब्रह्मचर्यमेव तपः' — ब्रह्मचर्य ही सबसे श्रेष्ठ तप है। कठोपनिषद (2/24) — आत्मा बलहीन को नहीं मिलती — यह बल तपस्या का है।
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