का सरल उत्तर
वैराग्य एक मानसिक अवस्था है — विषयों में आसक्ति का अभाव — जो गृहस्थ रहते हुए भी हो सकता है। संन्यास एक विधिवत जीवनपद्धति है जिसमें परिवार, संपत्ति और सांसारिक दायित्वों का बाह्य त्याग होता है। वैराग्य संन्यास की पूर्वशर्त है — बिना वैराग्य के संन्यास केवल दिखावा है।
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