का सरल उत्तर
वैष्णवास्त्र एकल लक्ष्य पर और विष्णु की कृपा से मिलता था, जबकि नारायणास्त्र अनेक लक्ष्यों पर और एक युद्ध में केवल एक बार प्रयोग होता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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