का सरल उत्तर
वार्षिक एकोद्दिष्ट हर साल पितर की मृत्यु तिथि पर किया जाता है। यह मृत्यु के ठीक एक वर्ष बाद यानी प्रथम वर्षी से शुरू होकर प्रतिवर्ष उसी मास और उसी तिथि पर लगातार किया जाता है। यदि मृत्यु ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को हुई थी, तो प्रतिवर्ष ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को ही श्राद्ध होगा। यह वंशज का स्थायी आजीवन कर्तव्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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