का सरल उत्तर
वायु पुराण में ऋषियों के अलग-अलग मत हैं — अत्रि (100 कोण), भृगु (1000 कोण), सावर्णि (अष्टकोण), वार्ष्यायणि (निराकार), गार्ग्य (वेणी जैसा)। निष्कर्ष — केवल ब्रह्मा ही जानते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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