विस्तृत उत्तर
वायु पुराण में ब्रह्मपुर की वास्तुकला और आकार के विषय में विभिन्न महान ऋषियों के भिन्न-भिन्न मत प्रस्तुत किये गए हैं। महर्षि अत्रि के अनुसार ब्रह्मा जी की यह सभा सौ कोणों वाली है। महर्षि भृगु का मत है कि यह एक हजार कोणों वाली है। महर्षि सावर्णि इसे अष्टकोणीय बताते हैं जबकि महर्षि भागुरि का मानना है कि इसका आकार चतुर्भुज है। महर्षि वार्ष्यायणि का मत है कि यह सभा महासागर के समान निराकार है, क्रौष्टुकि इसे वृत्ताकार बताते हैं और महर्षि गार्ग्य के अनुसार यह किसी स्त्री की गुंथी हुई वेणी के समान प्रतीत होती है। वायु पुराण निष्कर्ष देता है कि सत्यलोक का दिव्य स्वरूप इतना असीम है कि केवल महान ब्रह्मा ही इसका सटीक वर्णन कर सकते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





