वेद में सोम क्या है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
वेद में सोम के तीन मुख्य अर्थ हैं — एक पर्वतीय लता जिसका रस यज्ञ में अर्पित होता था, चन्द्रमा, और प्रसंगानुसार ईश्वर/प्राण/आनन्द। यह मादक पदार्थ नहीं था — वेद में सोम और मद्य (सूरा) अलग-अलग बताये गये हैं। सोमरस पुष्टिकारक और आयुवर्धक था।
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