का सरल उत्तर
विशिष्टाद्वैत में मोक्ष = ज्ञान मात्र से नहीं — नारायण के प्रति अनन्य प्रेम, भक्ति और प्रपत्ति (पूर्ण समर्पण) से। मुक्ति के बाद जीव वैकुंठ में भगवान के साथ शाश्वत आनंदमय संबंध में रहता है — विलीन नहीं होता।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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