का सरल उत्तर
जब सृष्टि से पहले सब जलमग्न था, तब शेषनाग पर विश्राम करते भगवान विष्णु की नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ और उस पर ब्रह्माजी स्वयंभू प्रकट हुए। इसीलिए ब्रह्मा को 'पद्मयोनि' और 'नाभिज' कहते हैं। यह सृष्टि-रचना के क्रम में विष्णु की पालक-शक्ति से ब्रह्मा की सृजन-शक्ति का प्रादुर्भाव है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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