का सरल उत्तर
रामचरितमानस के अनुसार विषपान के समय शिव ने अपने इष्ट श्रीराम का नाम लिया था, जिसके प्रभाव से भयंकर कालकूट विष उनके लिए अमृत समान हो गया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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