का सरल उत्तर
कन्यादान = सर्वश्रेष्ठ महादान। पिता कन्या का हाथ वर को सौंपता है। मूलतः 'पाणिग्रहण' = परस्पर हाथ ग्रहण। वर प्रतिज्ञा: धर्म, अर्थ, काम में अतिक्रमण नहीं करेगा। कन्यादान = उत्तरदायित्व हस्तांतरण, वस्तु-दान नहीं। पुण्य भूमि-गोदान से अधिक।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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