का सरल उत्तर
व्याघ्रचर्म आसन तेज, बल, साहस और राजसी सफलता के लिए है। स्वयं भगवान शिव इस आसन पर विराजते हैं — जो अहंकार-विजय का प्रतीक है। निर्विघ्न साधना और विषैले जंतुओं से रक्षा इसका विशेष फल है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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