का सरल उत्तर
'क्षीणे पुण्ये' = स्वर्लोक में पुण्य खत्म होने पर वापसी। 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते' = मोक्ष में कोई वापसी नहीं। यही स्वर्लोक (अस्थायी) और परम धाम (नित्य) का मूल अंतर है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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