का सरल उत्तर
यक्षों में रक्षक और तामसिक दोनों प्रवृत्तियाँ हैं; इसलिए वे कभी परोपकारी और कभी भयंकर रूप में वर्णित होते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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