का सरल उत्तर
व्रत हमेशा अगले दिन (द्वादशी को) 'हरि वासर' (शुरुआती समय) बीतने के बाद सुबह खोलना चाहिए। व्रत खोलने से पहले ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना शुभ होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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