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श्रीमद्भगवद्गीता · क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 4

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग · Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga

मूल पाठ

तत्क्षेत्रं यच्च यादृक् च यद्विकारि यतश्च यत् | स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे श्रृणु

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वह क्षेत्र जो है, जैसा है, जिन विकारोंवाला है और जिससे जो पैदा हुआ है; तथा वह क्षेत्रज्ञ भी जो है और जिस प्रभाववाला है, वह सब संक्षेपमें मेरेसे सुन।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

वह क्षेत्र जो है, जैसा है, जिन विकारोंवाला है और जिससे जो पैदा हुआ है; तथा वह क्षेत्रज्ञ भी जो है और जिस प्रभाववाला है, वह सब संक्षेपमें मेरेसे सुन।

English Meaning

What the field is and of what nature, what are its modifications and whence it is and also who He is and what His powers are hear all that from Me in brief.

What the field is and of what nature, what are its modifications and whence it is and also who He is and what His powers are hear all that from Me in brief.

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