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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 27

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च | तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

क्योंकि पैदा हुएकी जरूर मृत्यु होगी और मरे हुएका जरूर जन्म होगा। इस (जन्म-मरण-रूप परिवर्तन के प्रवाह) का परिहार अर्थात् निवारण नहीं हो सकता। अतः इस विषयमें तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

क्योंकि पैदा हुएकी जरूर मृत्यु होगी और मरे हुएका जरूर जन्म होगा। इस (जन्म-मरण-रूप परिवर्तन के प्रवाह) का परिहार अर्थात् निवारण नहीं हो सकता। अतः इस विषयमें तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये।

English Meaning

For certain is death for the born, and certain is birth for the dead; therefore, over the inevitable thou shouldst not grieve.

For certain is death for the born, and certain is birth for the dead; therefore, over the inevitable thou shouldst not grieve.

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