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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 36

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः | निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी?

English Meaning

Thy enemies also, cavilling at thy power, will speak many abusive words. What is more painful than this?

Thy enemies also, cavilling at thy power, will speak many abusive words. What is more painful than this?

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