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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 53

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला | समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस कालमें शास्त्रीय मतभेदोंसे विचलित हुई तेरी बुद्धि निश्चल हो जायगी और परमात्मामें अचल हो जायगी, उस कालमें तू योगको प्राप्त हो जायगा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस कालमें शास्त्रीय मतभेदोंसे विचलित हुई तेरी बुद्धि निश्चल हो जायगी और परमात्मामें अचल हो जायगी, उस कालमें तू योगको प्राप्त हो जायगा।

English Meaning

When thy intellect, which is perplexed by the Veda text, which thou hast read, shall stand immovable and steady in the Self, then thou shalt attain Self-realisation.

When thy intellect, which is perplexed by the Veda text, which thou hast read, shall stand immovable and steady in the Self, then thou shalt attain Self-realisation.

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