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श्रीमद्भगवद्गीता · सांख्य योग

श्लोक 71

सांख्य योग · Sankhya Yoga

मूल पाठ

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः | निर्ममो निरहंकारः स शांतिमधिगच्छति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका त्याग करके स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर आचरण करता है, वह शान्तिको प्राप्त होता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका त्याग करके स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर आचरण करता है, वह शान्तिको प्राप्त होता है।

English Meaning

That man attains peace who, abandoning all desires, moves about without longing, without the sense of mine and without egoism.

That man attains peace who, abandoning all desires, moves about without longing, without the sense of mine and without egoism.

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