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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म संन्यास योग

श्लोक 23

कर्म संन्यास योग · Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् | कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस मनुष्य-शरीरमें जो कोई (मनुष्य) शरीर छूटनेसे पहले ही काम-क्रोधसे उत्पन्न होनेवाले वेगको सहन करनेमें समर्थ होता है, वह नर योगी है और वही सुखी है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इस मनुष्य-शरीरमें जो कोई (मनुष्य) शरीर छूटनेसे पहले ही काम-क्रोधसे उत्पन्न होनेवाले वेगको सहन करनेमें समर्थ होता है, वह नर योगी है और वही सुखी है।

English Meaning

He who is able, while still here (in this world) to withstand, before the liberation from the body, the impulse born out of desire and anger he is a Yogi, he is a happy man.

He who is able, while still here (in this world) to withstand, before the liberation from the body, the impulse born out of desire and anger he is a Yogi, he is a happy man.

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