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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 25

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

जेहिं ताड़का सुबाहु हति खंडेउ हर कोदंड। खर दूषन तिसिरा बधेउ मनुज कि अस बरिबंड॥25॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिसने ताड़का और सुबाहु को मारकर शिवजी का धनुष तोड़ दिया और खर, दूषण और त्रिशिरा का वध कर डाला, ऐसा प्रचंड बली भी कहीं मनुष्य हो सकता है?॥25॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 25 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik