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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 26

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

मम पाछें धर धावत धरें सरासन बान। फिरि फिरि प्रभुहि बिलोकिहउँ धन्य न मो सम आन॥26॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

धनुष-बाण धारण किए मेरे पीछे-पीछे पृथ्वी पर (पकड़ने के लिए) दौड़ते हुए प्रभु को मैं फिर-फिरकर देखूँगा। मेरे समान धन्य दूसरा कोई नहीं है॥26॥

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