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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 28

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

क्रोधवंत तब रावन लीन्हिसि रथ बैठाइ। चला गगनपथ आतुर भयँ रथ हाँकि न जाइ॥28॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर क्रोध में भरकर रावण ने सीताजी को रथ पर बैठा लिया और वह बड़ी उतावली के साथ आकाश मार्ग से चला, किन्तु डर के मारे उससे रथ हाँका नहीं जाता था॥28॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 28 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik