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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 33

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव। मोहि समेत बिरंचि सिव बस ताकें सब देव॥33॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मन, वचन और कर्म से कपट छोड़कर जो भूदेव ब्राह्मणों की सेवा करता है, मुझ समेत ब्रह्मा, शिव आदि सब देवता उसके वश हो जाते हैं॥33॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 33 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik