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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 40

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ। पर उपकारी पुरुष जिमि नवहिं सुसंपति पाइ॥40॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फलों के बोझ से झुककर सारे वृक्ष पृथ्वी के पास आ लगे हैं, जैसे परोपकारी पुरुष बड़ी सम्पत्ति पाकर (विनय से) झुक जाते हैं॥40॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 40 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik