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श्रीरामचरितमानस · अरण्य काण्ड

अरण्य काण्ड दोहा 41

अरण्य काण्ड · Aranya Kaand

मूल पाठ

नाना बिधि बिनती करि प्रभु प्रसन्न जियँ जानि। नारद बोले बचन तब जोरि सरोरुह पानि॥41॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बहुत प्रकार से विनती करके और प्रभु को मन में प्रसन्न जानकर तब नारदजी कमल के समान हाथों को जोड़कर वचन बोले-॥41॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 41 अरण्य काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik