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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 103

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ। पूजिहि सब मनकामना सुजसु रहिहि जग छाइ॥103॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुम अपने प्राणनाथ और देवर सहित कुशलपूर्वक अयोध्या लौटोगी। तुम्हारी सारी मनःकामनाएँ पूरी होंगी और तुम्हारा सुंदर यश जगतभर में छा जाएगा॥103॥

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