ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
काण्ड 2

श्रीरामचरितमानसअयोध्या काण्ड

कुल 1,647 पद/श्लोक

श्लोक 1अयोध्या काण्ड
यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्री शंकरः पातु माम्‌॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
श्लोक 2अयोध्या काण्ड
प्रसन्नतां या न गताभिषेकतस्तथा न मम्ले वनवासदुःखतः।
मुखाम्बुजश्री रघुनन्दनस्य मे सदास्तु सा मंजुलमंगलप्रदा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
श्लोक 3अयोध्या काण्ड
नीलाम्बुजश्यामलकोमलांग सीतासमारोपितवामभागम्‌।
पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्‌॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥
भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई॥
मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती॥
सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली॥
राम रूपु गुन सीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा॥
सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें॥
वन तीनि काल जग माहीं। भूरिभाग दसरथ सम नाहीं॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिअ थोर सबु तासू॥
रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुटु सम कीन्हा॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा॥
नृप जुबराजु राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक। भए राम सब बिधि सब लायक॥
सेवक सचिव सकल पुरबासी। जे हमार अरि मित्र उदासी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सबहि रामु प्रिय जेहि बिधि मोही। प्रभु असीस जनु तनु धरि सोही॥
बिप्र सहित परिवार गोसाईं। करहिं छोहु सब रौरिहि नाईं॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं॥
मोहि सम यहु अनुभयउ न दूजें। सबु पायउँ रज पावनि पूजें॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
अब अभिलाषु एकु मन मोरें। पूजिहि नाथ अनुग्रह तोरें॥
मुनि प्रसन्न लखि सहज सनेहू। कहेउ नरेस रजायसु देहू॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी॥
नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू॥
प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं। यह लालसा एक मन माहीं॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
पुनि न सोच तनु रहउ कि जाऊ। जेहिं न होइ पाछें पछिताऊ॥
सुनि मुनि दसरथ बचन सुहाए। मंगल मोद मूल मन भाए॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं॥
भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
मुदित महीपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत्रु बोलाए॥
कहि जयजीव सीस तिन्ह नाए। भूप सुमंगल बचन सुनाए॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
मंत्री मुदित सुनत प्रिय बानी। अभिमत बिरवँ परेउ जनु पानी॥
बिनती सचिव करहिं कर जोरी। जिअहु जगतपति बरिस करोरी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा॥
नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
हरषि मुनीस कहेउ मृदु बानी। आनहु सकल सुतीरथ पानी॥
औषध मूल फूल फल पाना। कहे नाम गनि मंगल नाना॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
चामर चरम बसन बहु भाँती। रोम पाट पट अगनित जाती॥
मनिगन मंगल बस्तु अनेका। जो जग जोगु भूप अभिषेका॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
बेद बिदित कहि सकल बिधाना। कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना॥
सफल रसाल पूगफल केरा। रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
रचहु मंजु मनि चौकें चारू। कहहु बनावन बेगि बजारू॥
पूजहु गनपति गुर कुलदेवा। सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा॥
बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सुनत राम अभिषेक सुहावा। बाज गहागह अवध बधावा॥
राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं॥
भए बहुत दिन अति अवसेरी। सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं॥
रामहि बंधु सोच दिन राती। अंडन्हि कमठ हृदय जेहि भाँती॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए॥
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
चौकें चारु सुमित्राँ पूरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रूरी॥
आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा॥
जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए॥
गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने॥
गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू॥
तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती। पठइअ काज नाथ असि नीती॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू॥
आयसु होइ सो करौं गोसाईं। सेवकु लइह स्वामि सेवकाईं॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ॥
भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
राम करहु सब संजम आजू। जौं बिधि कुसल निबाहै काजू॥
गुरु सिख देइ राय पहिं गयऊ। राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू॥
प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना॥
भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
हाट बाट घर गलीं अथाईं। कहहिं परसपर लोग लोगाईं॥
कालि लगन भलि केतिक बारा। पूजिहि बिधि अभिलाषु हमारा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता॥
सकल कहहिं कब होइहि काली। बिघन मनावहिं देव कुचाली॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा॥
सारद बोलि बिनय सुर करहीं। बारहिं बार पाय लै परहीं॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती॥
देखि देव पुनि कहहिं निहोरी। मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ॥
जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देव हित लागी॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
बार बार गहि चरन सँकोची। चली बिचारि बिबुध मति पोची॥
ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
आगिल काजु बिचारि बहोरी। करिहहिं चाह कुसल कबि मोरी॥
हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई। जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा॥
पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
करइ बिचारु कुबुद्धि कुजाती। होइ अकाजु कवनि बिधि राती॥
देखि लागि मधु कुटिल किराती। जिमि गवँ तकइ लेउँ केहि भाँती॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
भरत मातु पहिं गइ बिलखानी। का अनमनि हसि कह हँसि रानी॥
ऊतरु देइ न लेइ उसासू। नारि चरित करि ढारइ आँसू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें॥
तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि। छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई॥
रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
भयउ कौसिलहि बिधि अति दाहिन। देखत गरब रहत उर नाहिन॥
देखहु कस न जाइ सब सोभा। जो अवलोकि मोर मनु छोभा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
पूतु बिदेस न सोचु तुम्हारें। जानति हहु बस नाहु हमारें॥
नीद बहुत प्रिय सेज तुराई। लखहु न भूप कपट चतुराई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
सुनि प्रिय बचन मलिन मनु जानी। झुकी रानि अब रहु अरगानी॥
पुनि अस कबहुँ कहसि घरफोरी। तब धरि जीभ कढ़ावउँ तोरी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही॥
सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
जेठ स्वामि सेवक लघु भाई। यह दिनकर कुल रीति सुहाई॥
राम तिलकु जौं साँचेहुँ काली। देउँ मागु मन भावत आली॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी॥
मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू॥
प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
एकहिं बार आस सब पूजी। अब कछु कहब जीभ करि दूजी॥
फोरै जोगु कपारु अभागा। भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई॥
हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा। बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा॥
कोउ नृप होउ हमहि का हानी। चेरि छाड़ि अब होब कि रानी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा॥
तातें कछुक बात अनुसारी। छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही॥
तसि मति फिरी अहइ जसि भाबी। रहसी चेरि घात जनु फाबी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
तुम्ह पूँछहु मैं कहत डेराउँ। धरेहु मोर घरफोरी नाऊँ॥
सजि प्रतीति बहुबिधि गढ़ि छोली। अवध साढ़साती तब बोली॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
प्रिय सिय रामु कहा तुम्ह रानी। रामहि तुम्ह प्रिय सो फुरि बानी॥
रहा प्रथम अब ते दिन बीते। समउ फिरें रिपु होहिं पिरीते॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
भानु कमल कुल पोषनिहारा। बिनु जल जारि करइ सोइ छारा॥
जरि तुम्हारि चह सवति उखारी। रूँधहु करि उपाउ बर बारी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी॥
पठए भरतु भूप ननिअउरें। राम मातु मत जानब रउरें॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें॥
सालु तुमर कौसिलहि माई। कपट चतुर नहिं होई जनाई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी॥
रचि प्रपंचु भूपहि अपनाई। राम तिलक हित लगन धराई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका॥
आगिलि बात समुझि डरु मोही। देउ दैउ फिरि सो फलु ओही॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई॥
का पूँछहु तुम्ह अबहुँ न जाना। निज हित अनहित पसु पहिचाना॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू॥
खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें। सत्य कहें नहिं दोषु हमारें॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
जौं असत्य कछु कहब बनाई। तौ बिधि देइहि हमहि सजाई॥
रामहि तिलक कालि जौं भयऊ। तुम्ह कहुँ बिपति बीजु बिधि बयऊ॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी॥
जौं सुत सहित करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कैकयसुता सुनत कटु बानी। कहि न सकइ कछु सहमि सुखानी॥
तन पसेउ कदली जिमि काँपी। कुबरीं दसन जीभ तब चाँपी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी॥
फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी॥
दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
नैहर जनमु भरब बरु जाई। जिअत न करबि सवति सेवकाई॥
अरि बस दैउ जिआवत जाही। मरनु नीक तेहि जीवन चाही॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी॥
अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
जेहिं राउर अति अनभल ताका। सोइ पाइहि यहु फलु परिपाका॥
जब तें कुमत सुना मैं स्वामिनि। भूख न बासर नींद न जामिनि॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
पूँछेउँ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची। भरत भुआल होहिं यह साँची॥
भामिनि करहु त कहौं उपाऊ। है तुम्हरीं सेवा बस राऊ॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई॥
लखइ ना रानि निकट दुखु कैसें। चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी॥
कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाहीं। स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती॥
सुतहि राजु रामहि बनबासू। देहु लेहु सब सवति हुलासू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई॥
होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बुद्धि बखानी॥
तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कई भइसि अधारा॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
जौं बिधि पुरब मनोरथु काली। करौं तोहि चख पूतरि आली॥
बहुबिधि चेरिहि आदरु देई। कोपभवन गवनी कैकेई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकई केरी॥
पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई॥
राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
बाल सखा सुनि हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं॥
प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई॥
को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेहु निबाहनिहारा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
जेहिं-जेहिं जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं॥
सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता हृदयँ अति दाहू॥
को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ॥
सुरपति बसइ बाहँबल जाकें। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई॥
सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
सभय नरेसु प्रिया पहिं गयऊ। देखि दसा दुखु दारुन भयऊ॥
भूमि सयन पटु मोट पुराना। दिए डारि तन भूषन नाना॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अनअहिवातु सूच जनु भाबी॥
जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा॥
कहु केहि रंकहि करौं नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सकउँ तोर अरि अमरउ मारी। काह कीट बपुरे नर नारी॥
जानसि मोर सुभाउ बरोरू। मनु तव आनन चंद चकोरू॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें। परिजन प्रजा सकल बस तोरें॥
जौं कछु कहौं कपटु करि तोही। भामिनि राम सपथ सत मोही॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता॥
घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
छंद 25अयोध्या काण्ड
केहि हेतु रानि रिसानि परसत पानि पतिहि नेवारई। मानहुँ सरोष भुअंग भामिनि बिषम भाँति निहारई॥
दोउ बासना रसना दसन बर मरम ठाहरु देखई। तुलसी नृपति भवतब्यता बस काम कौतुक लेखई॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
पुनि कह राउ सुहृद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी॥
भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू॥
दलकि उठेउ सुनि हृदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
ऐसिउ पीर बिहसि तेहिं गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई॥
लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू॥
कपट सनेहु बढ़ाई बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
जानेउँ मरमु राउ हँसि कहई। तुम्हहि कोहाब परम प्रिय अहई॥
थाती राखि न मागिहु काऊ। बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू। दुइ कै चारि मागि मकु लेहू॥
रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ परु बचनु न जाई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
नहिं असत्य सम पातक पुंजा। गिरि सम होहिं कि कोटिक गुंजा॥
सत्यमूल सब सुकृत सुहाए। बेद पुरान बिदित मनु गाए॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई॥
बाद दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का। देहु एक बर भरतहि टीका॥
मागउँ दूसर बर कर जोरी। पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी॥
सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू। ससि कर छुअत बिकल जिमि कोकू॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा॥
बिबरन भयउ निपट नरपालू। दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
माथें हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन॥
मोर मनोरथु सुरतरु फूला। फरत करिनि जिमि हतेउ समूला॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा॥
भरतु कि राउर पूत न होंही। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
जो सुनि सरु अस लाग तुम्हारें। काहे न बोलहु बचनु सँभारें॥
देहु उतरु अनु करहु कि नाहीं। सत्यसंध तुम्ह रघुकुल माहीं॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहु सत्य जग अपजसु लेहू॥
सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
सिबि दधीचि बलि जो कछु भाषा। तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा॥
अति कटु बचन कहति कैकेई। मानहुँ लोन जरे पर देई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
आगें दीखि जरत सिर भारी। मनहुँ रोष तरवारि उघारी॥
मूठि कुबुद्धि धार निठुराई। धरी कूबरीं सान बनाई॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा॥
बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती॥
मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरु साखी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता॥
सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ॥
मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
रिस परिहरु अब मंगल साजू। कछु दिन गएँ भरत जुबराजू॥
एकहि बात मोहि दुखु लागा। बर दूसर असमंजस मागा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
अजहूँ हृदय जरत तेहि आँचा। रिस परिहास कि साँचेहुँ साँचा॥
कहु तजि रोषु राम अपराधू। सबु कोउ कहइ रामु सुठि साधू॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू॥
जासु सुभाउ अरिहि अनूकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
जिऐ मीन बरु बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना॥
कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीं। जीवनु मोर राम बिनु नाहीं॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना। जीवनु राम दरस आधीना॥
सुनि मृदु बचन कुमति अति जरई। मनहुँ अनल आहुति घृत परई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया॥
देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
रामु साधु तुम्ह साधु सयाने। राममातु भलि सब पहिचाने॥
जस कौसिलाँ मोर भल ताका। तस फलु उन्हहि देउँ करि साका॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
अस कहि कुटिल भई उठि ठाढ़ी। मानहुँ रोष तरंगिनि बाढ़ी॥
पाप पहार प्रगट भइ सोई। भरी क्रोध जल जाइ न जोई॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
दोउ बर कूल कठिन हठ धारा। भवँर कूबरी बचन प्रचारा॥
ढाहत भूपरूप तरु मूला। चली बिपति बारिधि अनूकूला॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची॥
गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही॥
राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती। नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता॥
कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
पुनि कह कटु कठोर कैकेई। मनहुँ घाय महुँ माहुर देई॥
जौं अंतहुँ अस करतबु रहेऊ। मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
दुइ कि होइ एक समय भुआला। हँसब ठठाइ फुलाउब गाला॥
दानि कहाउब अरु कृपनाई। होइ कि खेम कुसल रौताई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
छाड़हु बचनु कि धीरजु धरहू। जनि अबला जिमि करुना करहू॥
तनु तिय तनय धामु धनु धरनी। सत्यसंध कहुँ तृन सम बरनी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें॥
सो सबु मोर पाप परिनामू। भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई। सब गुन धाम राम प्रभुताई॥
करिहहिं भाइ सकल सेवकाई। होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटिहि न जाइहि काऊ॥
अब तोहि नीक लाग करु सोई। लोचन ओट बैठु मुहु गोई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
जब लगि जिऔं कहउँ कर जोरी। तब लगि जनि कछु कहसि बहोरी॥
फिरि पछितैहसि अंत अभागी। मारसि गाइ नहारू लागी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
राम राम रट बिकल भुआलू। जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू॥
हृदयँ मनाव भोरु जनि होई। रामहि जाइ कहै जनि कोई॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर॥
भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा॥
पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें॥
तेहि निसि नीद परी नहिं काहू। राम दरस लालसा उछाहू॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
पछिले पहर भूपु नित जागा। आजु हमहि बड़ अचरजु लागा॥
जाहु सुमंत्र जगावहु जाई। कीजिअ काजु रजायसु पाई॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
गए सुमंत्रु तब राउर माहीं। देखि भयावन जात डेराहीं॥
धाइ खाई जनु जाइ न हेरा। मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेहिं भवन भूप कैकेई॥
कहि जयजीव बैठ सिरु नाई। देखि भूप गति गयउ सुखाई॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
सोच बिकल बिबरन महि परेऊ। मानहु कमल मूलु परिहरेऊ॥
सचिउ सभीत सकइ नहिं पूँछी। बोली असुभ भरी सुभ छूँछी॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 1अयोध्या काण्ड
आनहु रामहि बेगि बोलाई। समाचार तब पूँछेहु आई॥
चलेउ सुमंत्रु राय रुख जानी। लखी कुचालि कीन्हि कछु रानी॥1॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 2अयोध्या काण्ड
सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ॥
उर धरि धीरजु गयउ दुआरें। पूँछहिं सकल देखि मनु मारें॥2॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 3अयोध्या काण्ड
समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका॥
राम सुमंत्रहि आवत देखा। आदरु कीन्ह पिता सम लेखा॥3॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें
चौपाई 4अयोध्या काण्ड
निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई॥
रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं॥4॥
पूरा अर्थ और व्याख्या पढ़ें