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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 31

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

लोभु न रामहि राजु कर बहुत भरत पर प्रीति। मैं बड़ छोट बिचारि जियँ करत रहेउँ नृपनीति॥31॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

राम को राज्य का लोभ नहीं है और भरत पर उनका बड़ा ही प्रेम है। मैं ही अपने मन में बड़े-छोटे का विचार करके राजनीति का पालन कर रहा था (बड़े को राजतिलक देने जा रहा था)॥31॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 31 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik