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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 35

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर। लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर॥35॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कैकेयी के मर्मभेदी वचन सुनकर राजा ने कहा कि तू जो चाहे कह, तेरा कुछ भी दोष नहीं है। मेरा काल तुझे मानो पिशाच होकर लग गया है, वही तुझसे यह सब कहला रहा है॥35॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 35 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik