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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 3

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार। फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन! आपका नाम और यश ही सम्पूर्ण मनचाही वस्तुओं को देने वाला है। हे राजाओं के मुकुटमणि! आपके मन की अभिलाषा फल का अनुगमन करती है (अर्थात आपके इच्छा करने के पहले ही फल उत्पन्न हो जाता है)॥3॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 3 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik