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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 27

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मागु मागु पै कहहु पिय कबहुँ न देहु न लेहु। देन कहेहु बरदान दुइ तेउ पावत संदेहु॥27॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे प्रियतम! आप माँग-माँग तो कहा करते हैं, पर देते-लेते कभी कुछ भी नहीं। आपने दो वरदान देने को कहा था, उनके भी मिलने में संदेह है॥27॥

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