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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 2

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

यह बिचारु उर आनि नृप सुदिनु सुअवसरु पाइ। प्रेम पुलकि तन मुदित मन गुरहि सुनायउ जाइ॥2॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हृदय में यह विचार लाकर (युवराज पद देने का निश्चय कर) राजा दशरथजी ने शुभ दिन और सुंदर समय पाकर, प्रेम से पुलकित शरीर हो आनंदमग्न मन से उसे गुरु वशिष्ठजी को जा सुनाया॥2॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 2 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik