ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 30

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

धरम धुरंधर धीर धरि नयन उघारे रायँ। सिरु धुनि लीन्हि उसास असि मारेसि मोहि कुठायँ॥30॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

धर्म की धुरी को धारण करने वाले राजा दशरथ ने धीरज धरकर नेत्र खोले और सिर धुनकर तथा लंबी साँस लेकर इस प्रकार कहा कि इसने मुझे बड़े कुठौर मारा (ऐसी कठिन परिस्थिति उत्पन्न कर दी, जिससे बच निकलना कठिन हो गया)॥30॥

आगे पढ़ें — अयोध्या काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 30 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik