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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 12

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि। अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि॥12॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मन्थरा नाम की कैकेई की एक मंदबुद्धि दासी थी, उसे अपयश की पिटारी बनाकर सरस्वती उसकी बुद्धि को फेरकर चली गईं॥12॥

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