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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 37

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

द्वार भीर सेवक सचिव कहहिं उदित रबि देखि। जागेउ अजहुँ न अवधपति कारनु कवनु बिसेषि॥37॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

राजद्वार पर मंत्रियों और सेवकों की भीड़ लगी है। वे सब सूर्य को उदय हुआ देखकर कहते हैं कि ऐसा कौन सा विशेष कारण है कि अवधपति दशरथजी अभी तक नहीं जागे?॥37॥

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