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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 17

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तुम्हहि न सोचु सोहाग बल निज बस जानहु राउ। मन मलीन मुँह मीठ नृपु राउर सरल सुभाउ॥17॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुमको अपने सुहाग के (झूठे) बल पर कुछ भी सोच नहीं है, राजा को अपने वश में जानती हो, किन्तु राजा मन के मैले और मुँह के मीठे हैं! और आपका सीधा स्वभाव है (आप कपट-चतुराई जानती ही नहीं)॥17॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 17 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik