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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 23

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्रमुदित पुर नर नारि सब सजहिं सुमंगलचार। एक प्रबिसहिं एक निर्गमहिं भीर भूप दरबार॥23।

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बड़े ही आनन्दित होकर नगर के सब स्त्री-पुरुष शुभ मंगलाचार के साथ सज रहे हैं। कोई भीतर जाता है, कोई बाहर निकलता है, राजद्वार में बड़ी भीड़ हो रही है॥23॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 23 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik