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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 4

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु। सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु॥4॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन्‌! अब देर न कीजिए, शीघ्र सब सामान सजाइए। शुभ दिन और सुंदर मंगल तभी है, जब श्री रामचन्द्रजी युवराज हो जाएँ (अर्थात उनके अभिषेक के लिए सभी दिन शुभ और मंगलमय हैं)॥4॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 4 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik