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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

दोहा 16

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि। सुरमाया बस बैरिनिहि सुहृद जानि पतिआनि॥16॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आधाररहित (अस्थिर) बुद्धि की स्त्री और देवताओं की माया के वश में होने के कारण रहस्ययुक्त कपट भरे प्रिय वचनों को सुनकर रानी कैकेयी ने बैरिन मन्थरा को अपनी सुहृद् (अहैतुक हित करने वाली) जानकर उसका विश्वास कर लिया॥16॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 16 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik