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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 18

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु। कहिसि कथा सत सवति कै जेहि बिधि बाढ़ बिरोधु॥18॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस तरह करोड़ों कुटिलपन की बातें गढ़-छोलकर मन्थरा ने कैकेयी को उलटा-सीधा समझा दिया और सैकड़ों सौतों की कहानियाँ इस प्रकार (बना-बनाकर) कहीं जिस प्रकार विरोध बढ़े॥18॥

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